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कौन हैं छत्तीसगढ़ के सतनामी?, जिन्होंने बलौदा बाजार में डीएम के ऑफिस में लगा दी आग – Utkal Mail

रायपुर: छत्तीसगढ़ का बलौदा बाज़ार सुलग रहा है। धार्मिक स्तंभ को नुकसान पहुंचाने पर सतनामी समाज भड़का है। यहां सतनामियों का प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने डीएम ऑफिस में आग लगा दी। पुलिस के साथ भयंकर झड़प हुई। कानून व्यवस्था के संकट पर ज़िले में धारा-144 लागू है। राज्य की पुलिस हालात नियंत्रित करने में जुटी है। छत्तीसगढ़ के इस घटनाक्रम पर हम बात करेंगे, लेकिन इससे पहले इस सवाल का जवाब जान लेते हैं कि सतनामी पंथ आखिर है क्या है? 

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध संत, बाबा घासीदास ने सतनाम पंथ की स्थापना की थी। वर्ष 1756 में बलौदा बाज़ार ज़िले के गिरौदपुरी के एक गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ था। बाबा घासीदास ने अपने गांव गिरौदपुरी में अपना आश्रम बनाया। सच की तलाश में सोनाखान के जंगलों में लंबी तपस्या कर ज्ञान प्राप्त किया। छत्तीसगढ़ में हर साल 18 दिसंबर को उनकी जयंती मनाई जाती है। 

बाबा घासीदास आर्थिक और सामाजिक, दोनों स्तर पर फैले भेदभाव से काफी दुखी थी। उन्होंने मनुष्यों के शोषण और जातिवाद का खात्मा करके, हर मनुष्य एक समान का संदेश दिया। सामाजिक बुराईयों पर तगड़ा प्रहार किया। सतनामी समाज आज भी उसी पंरपरा का वाहक है। आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े होने के चलते सतनामी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया। 

बलौदा बाज़ार की हिंसक झड़प के कारण आज सतनामी समाज देशभर में चर्चा के केंद्र में है। मंगलवार को समाज के करीब पांच हजार लोगों ने बलौदा बाज़ार के डीएम ऑफिस का घेराव किया था। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए। लेकिन भीड़ नहीं रुकी और पुलिस के साथ झड़प हो गई। इस तरह अहिंसक वादे के साथ शुरू हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया।

पवित्र अमर गुफा में तोड़फोड़ से आक्रोश 
-बलौदा बाजार ज़िले के गिरौदपुरी धाम में एक पवित्र अमर गुफा है। गुफा में एक जैतखंभ है, सतनामी समाज इसी की पूजा करता है। बीती 15-16 मई की दरमियानी रात को कुछ अज्ञात लोगों ने यहां तोड़फोड़ कर दी। पवित्र प्रतीक के रूप में पूजे जाने वाले जैतखंभ को नुकसान पहुंचाने की घटना से समाज आक्रोशित हो गया। और उसी तभी से इस घटना के ख़िलाफ विरोध-प्रदर्शन चल रहा है, जो अब हिंसा की हद तक जा पहुंचा है। 

एसपी ऑफिस में आग का तांडव
सतलाम समाज के लोग कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंच गए और वहां तोड़फोड़ किया। थोड़ी देर में बेरिकेड तोड़कर एसपी कार्याल समेत पूरे कलेक्टर ऑफिस को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं इस दौरान रास्ते में दो चक्के या चार चक्के जितनी भी गाड़िया खड़ी थी, सबको आग के हवाले कर दिया। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

अब कैसे हैं बलौदा बाजार के हालात 
सतनामी समाज और पुलिस के बीच टकराव के बाद फिलहाल जिले में अगले 16 जून तक के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के प्रमुख सचिव और डीजीपी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। बलौदा बाजार में भारी पुलिस बल तैनात है। पुलिस हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। फिलहाल अभी स्थितियां नियंत्रित हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल का पहरा है। 

केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग 
सतनामी समाज पवित्र प्रतीक को नुकसान पहुंचाए जाने के मामले में केंद्रीय एजेंसीज से जांच की मांग उठाए है। पुलिस-प्रशासन प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद कर रहा था। लेकिन कोई हल नहीं निकला और अब इस विरोध ने हिंसा का रूप ले लिया। सनद रहे कि सतनामी समाज छत्तीसगढ़ के सबसे प्रभावशाली समाजों से एक है। राज्य की अनुसूचित जातियों में इस समाज की काफी बड़ी संख्या है।

इस समाज की एक और खासियत है कि, सतनामी अन्याय और अत्याचार बर्दाश्त नहीं करते। वैध तरीके से पैसा कमाने और अपने रहन-सहन खान-पान से जुड़े पारंपरिक मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।  बहरहाल, इस हिंसक घटना ने छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार को थोड़ा अशांत जरूर कर दिया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही स्थितियां सामान्य होंगी।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़: बलौदा बाजार में सतनामी समाज का उग्र प्रदर्शन, कलेक्टर ऑफिस को किया आग के हवाले


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