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अच्छे मानसून से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान, 10-15 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में आय वृद्धि की उम्मीद – Utkal Mail

मुंबई। देश में इस वर्ष सामान्य से बेहतर माॅनसून की संभावनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है और इससे कृषि एवं एफएमसीजी क्षेत्र की आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। स्मॉलकेस मैनेजर गोलफाई की बुधवार को जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि यदि मानसून की तीव्रता और वितरण कृषि क्षेत्रों में अनुकूल बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में कृषि-आधारित क्षेत्रों में 10-15 प्रतिशत तक की सालाना आय वृद्धि संभव है। 

इससे ट्रैक्टर, कृषि इनपुट, ग्रामीण एनबीएफसी और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ होगा। गोलफाई का मानना है कि खाद्य महंगाई में नरमी और अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर के 3.16 प्रतिशत पर आने जैसे संकेत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 06 जून की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। 

यदि मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से नीचे बनी रही तो अगस्त तक और 0.25 प्रतिशत की कटौती संभव है। इस तरह की मौद्रिक नरमी आवास, ऑटो और ऋण आधारित खपत क्षेत्रों में मांग को गति दे सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण आय में तेज सुधार के कारण एफएमसीजी, दोपहिया वाहन और कृषि उपकरणों जैसे खपत आधारित क्षेत्रों में छह से आठ प्रतिशत की बिक्री वृद्धि संभव है। डाबर, मैरिको, इमामी, हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियों को ग्रामीण बाजारों से अच्छे ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। 

वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एस्कॉर्ट्स कुबोटा जैसी कंपनियों की ट्रैक्टर बिक्री में पहले ही उल्लेखनीय सुधार दिखा है। मई 2025 में महिंद्रा ने 38,914 ट्रैक्टर बेचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी है वहीं एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने सालाना बिक्री में 15.7 प्रतिशत का मुनाफा दर्ज किया। इसके पीछे बेहतर जलाशय स्तर, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि और सरकारी योजनाओं का समर्थन रहा। 

गोलफाई को विश्वास है कि निफ्टी 50 अगली दो तिमाहियों में छह-आठ प्रतिशत रिटर्न दे सकता है विशेषकर मिडकैप और दर-संवेदनशील शेयरों में निवेशक रुचि दिखा सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी इस साल औसत से छह प्रतिशत अधिक बारिश की भविष्यवाणी की है, जिससे कृषि और ग्रामीण खपत को और गति मिलने की संभावना है। वहीं, रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि कुछ क्षेत्रों को निकट भविष्य में दबाव का सामना करना पड़ सकता है। 

सीमेंट कंपनियों को दक्षिण भारत में निर्माण गतिविधियों के बाधित होने से कीमतों में 10-20 रुपये प्रति बैग की गिरावट देखनी पड़ी है। बिजली खपत में भी 4.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती को दर्शाती है। इसके अलावा, कूलिंग उत्पादों की बिक्री में गिरावट और कॉफी निर्यात पर भी माॅनसून के समय से पहले प्रभाव के कारण दबाव देखा गया है।

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