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जाजपुर में अवैध शराब कारोबार चरम पर; सामाजिक कार्यकर्ता सब्यसाची ने आबकारी सचिव से की शिकायत

जाजपुर: राज्य का आबकारी विभाग, जिसकी स्थापना 1 दिसंबर 1999 को सरकार के राजस्व-सृजन के प्रमुख विभाग के रूप में की गई थी, का मुख्य दायित्व शराब के उत्पादन, वितरण और बिक्री को नियंत्रित करना तथा अवैध और नकली शराब पर रोक लगाना है। लेकिन जाजपुर जिले में बढ़ते भ्रष्टाचार, प्रशासनिक शिथिलता और अवैध शराब कारोबार के प्रसार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जो जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार सब्यसाची साहू के अनुसार जाजपुर में आबकारी प्रशासन “पूरी तरह ध्वस्त” हो चुका है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध नशीले पदार्थों और प्रतिबंधित कारोबार में तेजी आई है। हाल के महीनों में मिलावटी शराब, केमिकल-आधारित देशी शराब, गांजा और ब्राउन शुगर की खुली बिक्री कथित रूप से कई गुना बढ़ गई है, जिससे जिला एक गंभीर सामाजिक संकट की ओर बढ़ रहा है। सरकारी नियंत्रण वाले शराब उत्पादन में जहां गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं अवैध बाज़ार तेजी से फैल रहा है और लत तथा संबंधित आपराधिक घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

हालाँकि विभिन्न थानों में लगातार मामले दर्ज हो रहे हैं, लेकिन साहू का आरोप है कि कई अवैध शराब गिरोहों के मुख्य आरोपी अब भी गिरफ्तारी से दूर हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ आबकारी अधिकारी “कानून लागू करने के बजाय रिश्वत वसूली पर अधिक ध्यान दे रहे हैं”, जिससे काले बाज़ार को फलने-फूलने का अवसर मिल रहा है। मोबाइल स्क्वाड और प्रवर्तन टीम पर भी आरोप है कि वे अवैध धंधों पर कार्रवाई करने के बजाय कुछ क्षेत्रों में सिर्फ औपचारिक भ्रमण कर अवांछित वसूली में लगी रहती हैं।

साहू ने आबकारी अधीक्षक, जाजपुर पर भी गंभीर आरोप लगाए—जिनमें जब्त शराब की कथित अनधिकृत बिक्री, बढ़ते आदतन अपराधियों पर नरमी बरतना और अवैध शराब बनाने वालों के फैलते नेटवर्क पर अंकुश लगाने में विफलता शामिल है।

इसी पृष्ठभूमि में सब्यसाची साहू ने सोमवार (08.12.2025) को लोेक सेवा भवन में ओडिशा के आबकारी प्रमुख सचिव भास्कर शर्मा से भेंट की। बैठक के दौरान साहू ने जिले की वर्तमान स्थिति से संबंधित विस्तृत दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए तथा राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए साहू ने बताया कि प्रमुख सचिव ने दस्तावेजों की समीक्षा की और मामले की विस्तृत जांच कराने का आश्वासन दिया। शर्मा ने यह भी कहा कि जाजपुर में प्रभावी आबकारी प्रशासन को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इन गंभीर आरोपों के बाद जिले में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार को रोकने के लिए राज्य सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या न केवल जान जोखिम में डाल रही है, बल्कि परिवारों को भी बिखेर रही है और पूरे समाज के लिए खतरा बनती जा रही है।

utkalmailtv

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