कालिमुंडी कीट प्रकोप से जाजपुर के मूंगफली किसान संकट में

जाजपुर: जाजपुर ब्लॉक के रुद्रपुर पंचायत क्षेत्र में चालू रबी मौसम के दौरान की गई मूंगफली की खेती इस समय गंभीर संकट से जूझ रही है। “कालिमुंडी” नामक हानिकारक कीट के व्यापक प्रकोप के कारण 500 एकड़ से अधिक कृषि भूमि में लगी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे सैकड़ों किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं। किसान संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र प्रभावी नियंत्रण उपाय नहीं किए गए, तो पूरा उत्पादन नष्ट होने की आशंका है। स्थानीय किसानों के अनुसार बेणापाट, महादेव पाट, तिनिमुंडिया पाट, अटाकूल, बालिया पाट, तिनिमाणिकुल, जोरकुल पाट, गुहाली पाट और बंकाताल जैसे इलाकों में कीट का प्रकोप सबसे अधिक देखा जा रहा है। इन क्षेत्रों में मूंगफली की फसल हरी-भरी होने के बावजूद कालिमुंडी कीट के हमले से तेजी से नष्ट हो रही है। किसानों ने बताया कि यह कीट दिन में मिट्टी के भीतर पौधों की जड़ों के पास छिपा रहता है और शाम ढलते ही बाहर निकलकर पौधों की कोमल पत्तियों को खा जाता है, जिससे पौधे कुछ ही दिनों में सूखकर खड़े-खड़े नष्ट हो जाते हैं। इस वर्ष अनुकूल मौसम और अच्छे बाजार मूल्य की उम्मीद में किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंगफली की खेती की थी। कई किसानों ने बैंक, सहकारी समितियों और निजी साहूकारों से कर्ज लेकर बीज, खाद और कीटनाशक खरीदे थे।
अब फसल के बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति बुरी तरह डगमगा गई है। किसान कहते हैं कि यदि उन्हें कोई राहत या मुआवजा नहीं मिला तो कर्ज चुकाना असंभव हो जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि कीट प्रकोप की सूचना कृषि विभाग को पहले ही दे दी गई थी, लेकिन अभी तक न तो पर्याप्त तकनीकी सहायता मिली है और न ही प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध कराए गए हैं। इससे किसानों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है। कृषि अधिकारी विभूति भूषण पति ने बताया कि मामले को कृषि विज्ञान केंद्र को अवगत करा दिया गया है और विशेषज्ञों की टीम द्वारा खेतों का निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कीट की पहचान और उसके नियंत्रण के लिए उपयुक्त दवाइयों की सिफारिश शीघ्र की जाएगी। इस बीच प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कीटनाशक, तकनीकी मार्गदर्शन और संभावित मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया गया तो सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर गंभीर खतरा मंडराने लगेगा। किसानों ने सरकार से आपदा राहत के तहत विशेष पैकेज और फसल बीमा दावों के शीघ्र निपटारे की भी मांग की है, ताकि उन्हें इस अप्रत्याशित संकट से उबरने में मदद मिल सके।



