मालीवाल मारपीट मामला: सीएम आवास पर पहुंची दिल्ली पुलिस, CCTV DVR सहित कई सामान जब्त – Utkal Mail

नई दिल्ली। आप सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट मामले में दिल्ली पुलिस की जांच जारी है। जहां पुलिस की टीम रविवार को मुख्यमंत्री आवास के अंदर प्रिंटर, लैपटॉप लेकर पहुंची और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास से सीसीटीवी डीवीआर जब्त किया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कल दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के सहयोगी विभव कुमार को गिरफ्तार किया था।
बता दें कि शनिवार को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज ली थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक घटना के वक्त का फुटेज नहीं मिला है। पुलिस ये भी कह रही है कि बिभव जांच में स सहयोग नहीं कर रहा है।
दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) की नेता एवं राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के साथ कथित मारपीट मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार की पांच दिन की पुलिस हिरासत को मंजूरी देते हुए कहा कि आरोपी को पुलिस हिरासत में भेजा जाना ‘‘आवश्यक’’ है।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गौरव गोयल ने दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई की और इस दौरान दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने किया। पुलिस ने सात दिन की हिरासत का अनुरोध किया था।
आरोप है कि केजरीवाल के निजी सहायक कुमार ने 13 मई को मुख्यमंत्री आवास में मालीवाल के साथ मारपीट की थी। अदालत ने शनिवार देर रात पौने एक बजे जारी अपने आदेश में कहा, ‘‘दोनों पक्षों की ओर से दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद मुझे लगता है कि मौजूदा मामले में पुलिस हिरासत की आवश्यकता है। तदनुसार, जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा दिए गए आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है और आरोपी को पांच दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेजा जाता है।’’
उसने साक्ष्य एकत्र करने के लिए कुमार को मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में ले जाने की आवश्यकता संबंधी अभियोजन पक्ष की इस दलील पर गौर किया कि आरोपी की हिरासत के बिना ऐसा करना संभव नहीं है। अदालत ने कहा, ‘‘बेशक, मामला शुरुआती चरण में है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि मजिस्ट्रेट द्वारा शपथ पत्र पर दर्ज किए गए उनके (मालीवाल के) बयान में की गई है और इसके अलावा, पीड़िता या शिकायतकर्ता की चिकित्सकीय जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है।’’
मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘मैं संवैधानिक अदालतों के इस विचार से अवगत हूं कि मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसी को जांच पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही आरोपी के अधिकारों को भी संरक्षित किया जाना चाहिए।’’ अदालत ने जांच अधिकारी से कुमार को औपचारिक रूप से हिरासत में लेने को कहा। अदालत ने हर 24 घंटे में कुमार की चिकित्सकीय जांच कराए जाने का निर्देश दिया और कहा कि जांच एजेंसी आरोपी को ‘‘किसी भी तरह की यातना’’ नहीं देगी।
उसने कुमार को पुलिस हिरासत के दौरान अपने वकील और पत्नी से आधे-आधे घंटे के लिए मिलने की भी अनुमति दी। आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की कुमार की अर्जी भी स्वीकार कर ली गई। अदालत की कार्यवाही शनिवार रात करीब सवा नौ बजे शुरू हुई और श्रीवास्तव की शुरुआती दलीलों के बाद मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘मुझे एपीपी (अतिरिक्त लोक अभियोजक) की दलीलों में दम नजर आता है कि आरोपी को बिना किसी नोटिस के गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त आधार थे।’’
अभियोजक ने कई दलीलें दीं जिनमें रिमांड आवेदन में उल्लिखित तर्क भी शामिल थे। उसने यह भी दलील दी कि जिस ‘‘साधन या हथियार’’ से कुमार ने मालीवाल पर हमला किया था, उसे बरामद करना होगा। कुमार के वकीलों ने अभियोजन पक्ष की दलीलों का जवाब देते हुए डेढ़ घंटे से अधिक समय तक अपनी दलीलें जोरदार तरीके से पेश की।
कुमार के एक वकील राजीव मोहन ने दावा किया कि मालीवाल ने ‘‘विचार-विमर्श करने और मनगढ़ंत कहानी बनाने के बाद’’ प्राथमिकी दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने कुमार को शनिवार को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था और बाद में दिल्ली की एक अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को ‘‘निरर्थक’’ बताया।
ये भी पढ़ें- ‘कांग्रेस और JMM ने भ्रष्टाचार से नोटों के अंबार खड़े किए हैं’, PM मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना



