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सीबीआईसी प्रमुख का दावा- आयात शुल्क में कटौती के बाद सोने की तस्करी में आई गिरावट – Utkal Mail

नई दिल्ली। सरकार द्वारा जुलाई, 2024 में बहुमूल्य धातु पर आयात शुल्क में कटौती के बाद से सोने की तस्करी में उल्लेखनीय कमी आई है। अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने यह बात कही है। सरकार ने जुलाई, 2024 में सोने पर आयात शुल्क घटाकर छह प्रतिशत किया गया था। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सीमा शुल्क और डीआरआई अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून की अवधि में देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर 544 करोड़ रुपये मूल्य का 847 किलोग्राम सोना जब्त किया है। जुलाई में, सरकार ने सोने पर सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया था। अग्रवाल ने एक न्यूज एजेंसी के साथ साक्षात्कार में कहा, पिछले साल के बजट में सोने पर शुल्क की दर कम किए जाने के बाद सोने की तस्करी में उल्लेखनीय कमी आई है।’’ 

हालांकि, अग्रवाल ने जब्त किए गए सोने की मात्रा या मूल्य का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी मार्ग से मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात, सीमाओं और देश में आने वाले वाणिज्यिक कार्गो पर नियमित निगरानी रख रहे हैं। तस्करी, सीमा शुल्क या आयात या निर्यात प्रतिबंधों से बचने के लिए राष्ट्रीय सीमाओं के पार माल की गुप्त आवाजाही है। 

यह आमतौर पर तब होता है जब सीमा शुल्क इतना अधिक होता है कि तस्कर ऐसे उत्पादों को चोरी-छिपे लाकर अधिक लाभ कमा सकते हैं। सीबीआईसी के तहत राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) भारत में तस्करी-रोधी क्षेत्र में भारतीय सीमा शुल्क की शीर्ष एजेंसी है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान, अकेले डीआरआई अधिकारियों ने 1,319 किलोग्राम सोना जब्त किया था। यह 2023-24 में सीमा शुल्क अधिकारियों सहित सीबीआईसी द्वारा जब्त किए गए 4,869.6 किलोग्राम सोने का हिस्सा है।

 वर्ष के दौरान सीबीआईसी द्वारा 1,922 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर में जारी डीआरआई की भारत में तस्करी पर रिपोर्ट के अनुसार, भारत अवैध सोने के आयात का एक प्रमुख गंतव्य बन गया है। इसमें सोना और चांदी मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से आते हैं, जहां ये धातुएं कम कीमतों पर उपलब्ध हैं। 

भारत में हवाई मार्ग के माध्यम से सोने की तस्करी एक प्रमुख माध्यम है। पश्चिम एशियाई और दक्षिण पूर्व एशियाई देश पारंपरिक रूप से इसके मुख्य उद्गम स्थल रहे हैं। हाल ही में नैरोबी और अदीस अबाबा जैसे अफ्रीकी हवाई अड्डे, साथ ही ताशकंद जैसे हवाई अड्डे भी तस्करी के के लिए प्रमुख स्थान बनकर उभरे हैं।  


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