धर्म

हल्द्वानी: कल मनाई जाएगी नाग पंचमी रखा जाएगा विरूडा पंचमी का उपवास – Utkal Mail


हल्द्वानी, अमृत विचार। विरूडा पंचमी उत्तराखंड का स्थानीय पर्व है जोकि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को महिलाएं उपवास रख कर पांच प्रकार के अनाज भिगोती हैं जिसे कुमाऊं में विरूड़ कहा जाता है। अनाजों को ताम्र पात्र में भिगोने के बाद उमा-महेश्वर का ध्यान करके घर के एक कोने में अखंड दीपक प्रज्वलित करते हैं। दो दिन तक भीगने के उपरांत तीसरे दिन सप्तमी (सातूं)को इन्हें धोकर साफ कर लिया जाता है। अष्टमी (आठूं) को उपवास करके इन्हें गौरा-शंकर भगवान को चढ़ाया जाता हैं) कैसे यह पर्व आपकी मनोकमना पूर्ण करवा सकता है इस बारे में अधिक जानकारी दे रहीं हैं ज्योतिषाचार्य डा.मंजू जोशी…

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन नागों की पूजा करने से सारी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं।

नाग पंचमी मनाने का कारण
  
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नागों को देव रूप में बताया गया है। कहीं भगवान शिव के हार रूप में नजर आते हैं तो कहीं भगवान विष्णु की शैय्या रूप में। इतना ही नहीं सागर मंथन के समय नाग को महत्वपूर्ण भूमिका में रस्सी रूप में दिखाया गया है। पुराणों में तो कई दिव्य नाग और नागलोक तक का जिक्र किया गया है। इन्हीं कथाओं और मान्यताओं के कारण हिंदू धर्म में नागों को देवताओं के समान पूजनीय बताया गया है और पंचमी तिथि को नाग देवता को समर्पित किया गया है।

नाग पंचमी की प्रचलित कथा
महाभारत के अनुसार कुरु वंश के राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने का निर्णय किया था। राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी इसलिए जनमेजय ने यज्ञ से संसार के सभी सांपों की बलि चढ़ाने का निश्चिय किया।

राजा जनमेजय का यज्ञ इतना प्रभावशाली था कि उसके प्रभाव से सभी सांप अपने आप खिंचे चले आते थे। तक्षक नाग इस यज्ञ के भय से पाताल लोक में जाकर छिप गए। राजा जनमेजय ने भी तक्षक नाग की मृत्यु हेतु यज्ञ शुरू किया था लेकिन काफी समय व्यतीत होने के उपरांत भी तक्षक नाग नहीं आए तब राजा ने ऋषि मुनियों से यज्ञ में मंत्रों की शक्तियों को बढ़ाने को कहा, जिससे तक्षक नाग यज्ञ में आकर गिर जाएं।

शक्तिशाली मंत्रोच्चारण के प्रभाव से  तक्षक नाग यज्ञ की ओर खिंचे चले आ रहे थे। तक्षक नाग ने सभी देवताओं से अपने प्राणों की रक्षा हेतु याचना की। तदोपरांत देवताओं के आशीर्वाद से ऋषि जरत्कारु और नाग देवी मनसा के पुत्र आस्तिक मुनि नागों को हवन कुंड में जलने से बचाने के लिए आगे आए। ब्रह्माजी के वरदान के कारण आस्तिक मुनि ने जनमेजय के यज्ञ का समाप्त करवाकर नागराज के प्राणों की रक्षा की।

नाग पंचमी पर उपाय
जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष,सर्प दोष , गुरु चांडाल दोष, विष दोष आदि जैसे अशुभ दोष हो नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करके इन दोषों से मुक्ति पा सकते हैं। नाग पंचमी में कालसर्प दोष व कुण्डली में सभी प्रकार के दोष दूर करने हेतु नाग देवता के साथ भगवान शिव की पूजा और रूद्राभिषेक करना चाहिए। चांदी के नाग नागिन का जोड़ा पूजा के उपरांत नदी में प्रवाहित करें। इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कालसर्प दोष की पूजा करने से जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।


utkalmailtv

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button