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श्री त्रिवेणी जैन तीर्थ में आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज जी ने क्रोध को त्याग करने की सलाह दी

भिलाई। आज श्री त्रिणेवी जैन तीर्थ सेक्टर 6 में श्री 1008 पाश्र्वनाथ भगवान के मंगल अभिषेक पूजन एवं परमपूज्य 108 आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के ससंघ सनिध्य में उनके अमृत वचनों से शांतिधारा करने का सौभाग्य अनिल, सुधीर संदेश कासलीवाल एवं प्रभात जैन ने किया, साथ ही अभिषेक करने वालों मेें मंच संचालनकर्ता प्रशांत जैन एवं प्रदीप जैन बाकलीवाल, राकेश कासलीवाल, जिनेन्द्र जैन, संजीव जैन, निशंात जैन अशोक निगोतिया, भरत जैन, सुमित जैन आदि ने किया। जहां आचार्यश्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य नेमीचंद बाकलीवाल, स्टेशन रोड दुर्ग के भक्तों को मिला। आज आचार्यश्री को श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन महासभा सेक्टर 6 के अध्यक्ष ज्ञान चंद बाकलीवाल, मंत्री प्रशांत जैन,  प्रवीण छाबड़ा, देवेन्द्र जैन, सुरेन्द्र अजमेरा, जैन मिलन जैन ट्रस्ट के प्रभात जैन, मुकेश जैन, संजय चतुर, अमित जैन, पवन जैन, संतोष जैन भागचंद जैन, कमल जैन एवं डाक्टर प्रमोद विनायके, डॉ. आर. के जैन, डॉ. जिनेन्द्र जैन, संजीव कासलीवाल एवं दुर्ग भिलाई के सभी जैन मंदिरों के भक्तों ने आचार्यश्री को श्रीफल अर्पण कर आर्शीवाद ग्रहण किए। साथ ही आचार्य श्री के मंगल प्रवचन का धर्म लाभ हजारों भक्तों ने जैन भवन में लिया। इस अवसर पर प्रात: आचार्य श्री विशुद्ध महाराज जी के आर्शीवाद से याग मंडल विधान पूजन के दौरान जैन भवन प्रांगण में मंगल ध्वजारोहण धन्नू गंगवाल, ज्ञानचंद बाकलीवाल ने किया। प्रतिष्ठाआचार्य सरस जी ने मंत्रोचार्य के साथ धार्मिक विधान पूजन कराया।

आज आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी ने महत्ती धर्मसभा को अपने अमृत वचन में क्रोध को त्याग करने की सलाह दी एवं कहा कि क्रोध के कारण ही रावण ने सीता मैय्या एवं दुर्योधिन ने द्रौपदी का चीर हरण करने का प्रयास किया था। हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि गलती करने से पहले सोचना चाहिए कि गलती क्यो हुई नही करते तो अच्छा होता। नर्क जाने से बच सकता था। हमे मिथ्या छोड़ देना चाहिए। हम समाज को क्या दे रहे है देश की संस्कृति की रक्षा एवं समृद्ध करने के लिए क्या कर रहे है। बुद्धि ज्ञान, द्रव्य को जिन धर्म, जिन चेतना के साथ 9 देवताओं के भक्तों के लिए प्रयास होना चाहिए। जैन धर्म ने लेखा जोखा, बही खाते की जरूरत नही है।

स्वामी जी ने मोबाइल का जिक्र करते हुए कहा कि मोबाईल की शक्ति सीमित है लेकिन मनुष्य का ज्ञान असीमित होता है। हमे मोबाईल कम्प्यूटर पर आश्रित रहने की जरूरत नही। श्री श्री विशुद्ध सागर महाराज ने अपना प्रवचन जारी रखते हुए कहा कि हमने विश्व को गणित दिया, ज्योतिषशास्त्र, खगोल शास्त्र दिए जिसका विश्व सदा आभारी रहेगा। विश्व में 84 लाख योनिया है जो भटकते रहते है यदि हम अच्छा कर्म करेंगे तो हमे नर्क जाने की जरूरत नही होगी। आचार्यश्री जी ने सभी श्रद्धालुओं को धर्म सभा में आर्शीवाद दिए एवं गजत कल्याण के लिए कर्म करने संस्कारित रह कर जीवन यापन करने एवं विश्व कल्याण से ही सभी का कल्याण हो इस संकल्प के साथ काम करें।
आज आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज के आहारचर्या महावीर प्रकाश निगोतिया सेक्टर 6 बी मार्केट में हुई आचार्य श्री छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों के जैन मंदिरों के भक्तों ने श्रीफल अर्पण कर पाद प्रच्छालन करते हुए आर्शीवाद ग्रहण की। साढ़े 11 बजे परमपूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के आर्शीवाद एवं सनिध्य से श्री पाश्वनार्थ दिगंबर जैन मंदिर में बेदी निष्ठापन पूजन, तत्पश्चात वेदीविराजमान एवं यागमंडल विधान पश्चात् श्री 1008 आदिनाथ भगवान एवं श्री 1008 मुनिश्रुवत नाथ भगवान की भव्य पाषाढ़ की सफेद प्रतिमा स्थापित की गई। इस प्रतिमा के प्रदाता सिंघई सुरेशचंद, प्रशांत ममता, सम्प्रति, सम्प्रास जैन रिसाली परिवार एवं अरविंद जैन सेक्टर 4 ने सौभाग्य प्राप्त किया। मंदिर में भक्तों की अहिंसा परमो धर्म की जयकारा के साथ प्रतिमा जी को स्थापित होने पर दर्शन लाभ प्राप्त किए। अनेक भक्तगण का प्रतिमा स्थापित करने में विशिष्ट सहयोग रहा। दोपहर 3.30 बजे आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के मंगल प्रवचन का धर्मलाभ हजारों भक्तों ने लिया । श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन सभा के प्रचार प्रसार प्रभारी प्रदीप जैन बाकलीवाल ने बताया कि दिनांक 21 नवंबर को सुबह 06 बजे परमपूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के 31 वां मुनिदीक्षा दिवस अवसर पर जैन भवन में 6 बजे जाप अनुष्ठान , 6.30 बजे अभिषेक शांति धारा पूजन यज्ञ, 9 बजे आचार्य श्री के मंगल प्रवचन, साढ़े 10 बजे आहार चरया, 1.30 बजे परमपूज्य आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज जी के 31 वां मुनिदीक्षा महोत्सव शाम को 6.30 बजे, णमोकार चालिसा पाठ, आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

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