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लोढ़ा भाइयों ने सुलझाया ट्रेडमार्क एवं ब्रांड विवाद, जारी रखेगी मैक्रोटेक डेवलपर्स ‘लोढ़ा’ ब्रांड का इस्तेमाल – Utkal Mail

अमृत विचार। मैक्रोटेक डेवलपर्स के प्रमख अभिषेक लोढ़ा ने अपने छोटे भाई की कंपनी ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ (HOABL) के साथ चल रहे ट्रेडमार्क एवं ब्रांड विवाद को सुलझा लिया है। दोनों भाइयों के बीच हुए समझौते के मुताबिक, मैक्रोटेक डेवलपर्स पहले की तरह ‘लोढ़ा’ ब्रांड का इस्तेमाल करना जारी रखेगी, जबकि छोटा भाई ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ ब्रांड के तहत काम करना जारी रखेगा। माता-पिता के मार्गदर्शन में दोनों भाइयों के बीच यह समझौता हुआ है। इसके अलावा अभिषेक और अभिनंदन दोनों ही इस मामले में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह का कोई दावा नहीं करेंगे। 

जनवरी में मैक्रोटेक डेवलपर्स ने HoALB के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन के लिए बंबई उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर करने के साथ ही उचित रोक लगाने, राहत और हर्जाने की अपील की थी। मैक्रोटेक डेवलपर्स और एचओएबीएल ने अलग-अलग बयानों के माध्यम से लोढ़ा ब्रांड के उपयोग पर जारी विवाद को सुलझाने की सूचना दी है।

बयान के मुताबिक, ‘‘एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बड़े भाई अभिषेक लोढ़ा एवं छोटे भाई अभिनंदन लोढ़ा और उनकी अगुवाई वाली कंपनियों ने अपने माता-पिता के मार्गदर्शन में सभी लंबित विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है।’’ समझौते के मुताबिक, सूचीबद्ध इकाई मैक्रोटेक डेवलपर्स लिमिटेड के पास ‘लोढ़ा’ और ‘लोढ़ा समूह’ ब्रांड नामों का स्वामित्व है और उनके इस्तेमाल का इसे विशेष अधिकार है। 

वहीं अभिनंदन लोढ़ा ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ ब्रांड नाम के मालिक हैं और उनके पास इसके उपयोग का विशेष अधिकार है। बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि ‘लोढ़ा समूह’ और ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं है। दोनों ही संस्थाएं इसके बारे में व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करेंगी। इसके अलावा अभिनंदन लोढ़ा के पास लोढ़ा समूह या मैक्रोटेक डेवलपर्स या अभिषेक लोढ़ा के अन्य व्यवसायों में कोई अधिकार या दावा नहीं है। 

इसी तरह, अभिषेक के पास एचओएबीएल या अभिनंदन के अन्य व्यवसायों में कोई अधिकार या दावा नहीं है। बयान में दोनों भाइयों ने मध्यस्थता प्रक्रिया में मार्गदर्शन देने वाले न्यायमूर्ति आर वी रवींद्रन (सेवानिवृत्त) के प्रति हार्दिक आभार जताया है। मैक्रोटेक डेवलपर्स की गिनती देश की अग्रणी रियल एस्टेट कंपनियों में होती है जबकि एचओएबीएल प्रमुख शहरों में आवासीय भूखंडों के विकास में लगी हुई है।

 

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