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संस्कृत की महत्ता बताने आस्ट्रेलिया में आयोजित होगा सम्मेलन – Utkal Mail

नई दिल्ली। नयी दिल्ली स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बीएपीएस स्वामीनारायण अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया में सात से 15 सितंबर तक संस्कृत सम्मेलन का आयोजन करेगा।

सीएसयू दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने बुधवार को कहा कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, बीएपीएस स्वामीनारायण अनुसंधान संस्थान दिल्ली के साथ मिलकर सात से 15 सितंबर तक आस्ट्रेलिया में संस्कृत सम्मेलन को आयोजित करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन का लक्ष्य संस्कृत भाषा तथा इसके साहित्य में लिखे गये विविध ज्ञान के भण्डार तथा उसके चिन्तन के आधार पर भारत और आस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों में गर्माहट को और बढ़ाना है।

सप्ताह भर चलने वाले इस सम्मेलन में प्रो. वरुखेड़ी के अलावा सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, वेरावल , गुजरात के कुलपति प्रो सुकान्त कुमार सेनापति के साथ प्रो गणेश पण्डित और डा पवन व्यास भी सीएसयू की ओर से भाग लेंगे। ये सभी प्रतिभागी ब्रीसवेन,कैनवेरा तथा सिडनी जैसे शहरों के संस्कृत विद्वानों तथा संस्कृत अनुरागियों के साथ विमर्श भी करेंगे, ताकि इस लक्ष्य के उन्ननयन की दिशा में और अधिक कार्य हो सके।

प्रो वरखेड़ी ने कहा कि इस सम्मेलन में एक राउण्डटेबल (गोलमेज) सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड के संस्कृत विद्वानों के साथ भी एक परिचर्चा होना सुनिश्चित हुआ है ।

उल्लेखनीय है कि इसका लक्ष्य इस सम्मेलन में भाग ले रहे विदेशी प्रतिभागियों में संस्कृत के चर्चित पुस्तकों के प्रति पठन तथा लेखन आदि की रोचकता को बढ़ाने के साथ-साथ उच्चारण की सटीकता की भी श्रीवृद्धि करनी है। इसके अतिरिक्त दर्शन, मनोविज्ञान, विज्ञान, संगीत, कला ,अर्थशास्त्र,राजनीति ,योग आयुर्वेद तथा अध्यात्मिकता आदि के क्षेत्रों में शोध की संभावना पर भी चर्चा करना है ,ताकि यह तथ्य स्पष्ट हो सके कि आज की दुनिया में संस्कृत की कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है ? इसमें यह भी विमर्श किया जाना है कि वैश्विक सद्भाव तथा शान्ति में संस्कृत के माध्यम से क्या योगदान दिया जा सकता है।

सीएसयू के कुल सचिव प्रो आर.जी. मूरली कृष्ण ने कहा कि इस आयोजन के मेजवानी , यूनिवर्सिटी औफ सिडनी, प्रो मैक कोमास टेलर कर रहे हैं। प्रो मैक कोमास टेलर भारत में होने वाला अगला विश्व सम्मेलन के भी सदस्य हैं।

सीएसयू के डीन अकादमी प्रो मदन मोहन झा ने कहा कि कुलपति प्रो वरखेड़ी डैसौपरिक स्टडीज को ले कर वहां के प्रतिभागियों के साथ विमर्श करेंगे ,उससे भारत गौरव प्रकाश में आ सकेगा। प्रो काशीनाथ न्यौपाने,निदेशक, प्रकाशन विभाग ने भी कहा है कि इस दिशा में प्रकाशन कार्य भी आवश्यक है।

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