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Waqf Amendment Bill: आज सरकार की नजर मुसलमानों की संपत्ति हड़पने पर है, कल अन्य धार्मिक समुदाय होंगे निशाने पर- विपक्ष  – Utkal Mail

नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों ने बुधवार को कहा कि आज सरकार की नजर मुसलमानों की संपत्ति हड़पने पर है, कल अन्य धार्मिक समुदायों की संपत्ति निशाने पर होगी। कांग्रेस के के. सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि सरकार से अपेक्षा थी कि वह किसानों की कमाई दोगुनी करने के लिए या युवाओं के कल्याण के लिए कोई कानून बनाती, लेकिन इसका एक मात्र एजेंडा भारत माता को बांटना है। उन्होंने वैष्णो देवी एक्ट का हवाला देते हुए पूछा कि धर्म के आधार पर वक्फ बोर्ड में किसी अन्य समुदाय के लोगों को क्यों लिया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि मंदिरों के ट्रस्ट में जब गैर-हिन्दू सदस्य नहीं होते हैं तो फिर वक्फ के लिए दोहरा मानदंड क्यों? उन्होंने कहा, ‘‘आज आप मुस्लिम के खिलाफ हैं, कल ईसाई के खिलाफ होंगे, परसों सिख के खिलाफ होंगे। आपका एजेंडा राजनीतिक लाभ के लिए देश को बांटना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप देश को धर्म के नाम पर बांटना चाहते हैं, क्योंकि आपने आम लोगों के लिए कुछ नहीं किया है।’’ 

कांग्रेस के ही मोहम्मद जावेद ने कहा कि सरकार मुसलमानों की जमीन हड़प लेना चाहती है और इसमें जद यू, तेदेपा और लोजपा जैसी पार्टी सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के पारित होने के बाद देश की आधी आबादी अदालत के चक्कर लगाती रहेगी। उन्होंने विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार ईमानदार है तो मुसलमानों को व्यापक भागीदारी देकर नया विधेयक लाये। जावेद ने कहा कि मोदी सरकार पहले दिन से ही मुसलमानों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा, ‘‘(आपसे) दरख्वास्त है कि हिन्दुस्तान के लोगों को आपस में लड़ाने का प्रयास न करें।’’ 

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि यह संशोधन विधेयक केवल एक मसौदा नहीं, बल्कि मानव अधिकारों का उल्लंघन करने का जरिया साबित होगा। उन्होंने कहा कि आज सरकार की नजर मुसलमानों की वक्फ संपत्तियों पर है, आगे अन्य धर्म के लोगों की संपत्तियों पर होगी। उन्होंने कहा कि कल बौद्ध निशाने पर होंगे और आने वाले समय में हिन्दुओं के मंदिरों को भी सरकार के इस दंश को झेलना पड़ेगा। 

उन्होंने कहा कि भाजपा एक तरफ तो खुद को मुसलमानों की हितैषी बता रही है, लेकिन दुर्भाग्य से उसका एक भी मुस्लिम सांसद नहीं हैं। वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम समुदाय के लोगों को शामिल करने के सरकार के प्रयास पर टिप्पणी करते हुए सिंह ने पूछा कि राम मंदिर ट्रस्ट में महिलाओं और पिछड़ों को आरक्षण क्यों नहीं दिया गया था। चर्चा में हिस्सा लेते हुए समाजवादी पार्टी के मोहिबुल्लाह ने कहा कि यह विधेयक न केवल मुसलमानों के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ बल्कि समानता के अधिकार के खिलाफ भी है और इसे मुसलमानों की जमात कभी मंजूर नहीं करेगी। 

उन्होंने कहा कि मुसलमान इस मसौदा कानून को नहीं मानेंगे। सपा की ही इकरा चौधरी ने कहा कि वक्फ ‘बाई यूजर’ के प्रावधानों के जरिये संपत्ति हड़पने की साजिश की जा रही है। वाईएसआर कांग्रेस के पीवी मिथुन रेड्डी ने विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 में प्रदत्त अधिकारों के खिलाफ है। माकपा के के. राधाकृष्ण ने भी विधेयक का विरोध किया। 

आप के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि 11 साल से मुसलमानों के प्रति सरकार का क्या रवैया है, यह दिख रहा है। झामुमो के विजय कुमार हंसदाक ने भी विधेयक का विरोध किया। राष्ट्रीय लोकदल के डॉ. राजकुमार सांगवान ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह संशोधन विधेयक कल्याणकारी मार्ग प्रशस्त करने का बेहतर माध्यम साबित होगा। 

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