खेल

भारत के खिलाफ कनाडा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देने में बाइडेन प्रशासन ने नम्रता दिखाई : विशेषज्ञ – Utkal Mail


वाशिंगटन। भारत एवं अमेरिका के मामलों के एक शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ का कहना है कि भारत के साथ संबंधों के महत्व को समझते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या को लेकर कनाडा द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों के संबंध में अपनी सार्वजनिक प्रतिक्रिया में अत्यधिक नम्रता बरती। ‘टाटा चेयर फॉर स्ट्रेटेजिक अफेयर्स’ और प्रतिष्ठित ‘कार्नेगी एनडाऊमेंट फॉर इंटरनेशन पीस’ के वरिष्ठ शोधवेत्ता एशले जे टेलिस ने ‘पीटीआई’ से साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अमेरिका की प्रतिक्रिया वास्तव में बहुत उल्लेखनीय थी क्योंकि कनाडा एक बहुत करीबी सहयोगी है और यदि भारत के अलावा कोई अन्य देश होता तो मुझे लगता है कि अमेरिका की प्रतिक्रिया अधिक मुखर और अधिक स्पष्ट होती।’’ 

कनाडा ने खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की उसके देश में हुई हत्या में भारत के एजेंट के हाथ हो सकने के आरोप लगाए हैं। टेलिस से कनाडा के इन आरोपों को लेकर सवाल किए गए थे, जिसके जवाब ने उन्होंने यह बात कही। भारत ने कनाडा के आरोपों को ‘‘बेतुका’’ और ‘‘निहित स्वार्थों से प्रेरित’’ बताकर खारिज कर दिया है। 

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने इन आरोपों को लेकर चिंता जताई है और भारत से इस जांच में कनाडाई प्राधिकारियों के साथ सहयोग करने की अपील की है। टेलिस ने एक सवाल के जवाब में कहा, मुझे लगता है कि यह प्रशासन अपनी सार्वजनिक प्रतिक्रिया में अत्यधिक विनम्र होने के लिए पीछे झुका। उसने भारत को कनाडाई जांच में शामिल होने के लिए स्पष्ट रूप से प्रोत्साहित किया, लेकिन सीधे तौर पर निंदा करने वाले कोई शब्द नहीं कहे और मुझे लगता है कि यह प्रशासन के लिए काफी उल्लेखनीय है। मुझे लगता है कि लोगों को यह देखना चाहिए कि प्रशासन की प्रतिक्रिया का स्वर और विषय वस्तु दोनों कितने भिन्न थे। भारतीय मामलों पर सबसे सम्मानित एवं अग्रणी अमेरिकी विशेषज्ञ समझे जाने वाले टेलिस ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के तीन साल भारत एवं अमेरिका के संबंधों के लिए शानदार रहे हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘यह शानदार रहा। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो यह कल्पना करना कठिन है कि किसी भी प्रशासन ने, खासकर (अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप के बाद, नयी दिल्ली के साथ इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए इतना प्रयास किया होगा। इसका श्रेय वास्तव में राष्ट्रपति (जो) बाइडन को जाता है कि उन्होंने इन संबंधों की जिम्मेदारी ली है। जब प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) राजकीय दौरे पर आए थे तो बाइडन ने उनके साथ किस प्रकार व्यवहार किया और उसके बाद से जो भी पहलें हुई हैं, उनमें आप इसे बहुत स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।

टेलिस ने कहा, ‘‘अब बड़ा सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस और क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) बैठक के लिए भारत जा पाएंगे? अगर राष्ट्रपति जा पाते हैं, तो यह अद्भुत होगा लेकिन मुझे लगता है कि यदि वह ऐसा कर पाएंगे तो यह ऐसा वर्ष होगा जब चुनाव के कारण दोनों सरकारें अलग-अलग तरीके से व्यस्त होंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संबंधों को पिछले कई वर्षों की तरह निस्संदेह गति मिलेगी लेकिन मुझे नहीं लगता कि दोनों पक्षों में बड़ी पहल करने की क्षमता होगी क्योंकि राष्ट्रपति बाइडन अगले साल नवंबर तक यानी लगभग पूरे साल चलने वाली चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त होंगे और प्रधानमंत्री मोदी भी अगले कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में होने वाले चुनाव में व्यस्त रहेंगे।’’ टेलिस ने कहा कि संबंधों को लेकर समग्र तस्वीर बहुत अच्छी है और दोनों पक्षों के नेतृत्व ने संबंधों को आगे ले जाने के लिए उल्लेखनीय प्रतिबद्धता दिखाई है। 

उन्होंने कहा, ‘‘चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में बात करें तो अमेरिका की चीन से प्रतिस्पर्धा है। प्रशासन, विशेष रूप से विनिर्माण के लिए, उत्पादन आधार में विविधता लाने के जो प्रयास कर रहा है, वे वास्तव में बहुत प्रभावशाली हैं। इस योजना में भारत का स्थान बहुत ऊंचा है क्योंकि उसे एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखा जाता है इसलिए मुझे लगता है कि इन संबंधों का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। इस दौरान हमारे सामने हमेशा ऐसी समस्याएं रहेंगी जिनका प्रबंधन करना होगा, लेकिन मुझे लगता है कि जब तक दोनों पक्ष लक्ष्य पर नजर रखेंगे और दीर्घकालिक अवसरों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, हमारे संबंध अच्छे रहेंगे।’’ उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में चीन एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है।

ये भी पढ़ें : अमेरिका : निक्की हेली ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया ‘अराजकता’ पैदा करने का आरोप


utkalmailtv

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button