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तीन साल के लिये बढ़ी टाटा पावर डीडीएल के ‘स्मार्ट ग्रिड लैब’ की मान्यता – Utkal Mail


नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर डीडीएल) के स्मार्ट ग्रिड लैब को ‘इन-हाउस’ अनुसंधान एवं विकास इकाई के तौर पर मिली मान्यता तीन साल के लिये बढ़ा दी गई है।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग ने टाटा पावर डीडीएल के स्मार्ट ग्रिड लैब का ‘इन-हाउस’ शोध एवं विकास (आर एंड डी) इकाई के तौर पर नवीनीकरण करते हुए इसकी अवधि मार्च, 2026 तक बढ़ा दी है।

कंपनी ने बुधवार को एक बयान में कहा, ‘‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन आने वाले वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने उसके स्मार्ट ग्रिड लैब को ‘इन-हाउस’ अनुसंधान एवं विकास इकाई के तौर पर मिली मान्यता की अवधि तीन साल के लिये बढ़ा दी है।’’ मान्यता के नवीनीकरण से कंपनी अपनी अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिये जरूरी उत्पादों और उपकरणों का आयात शून्य शुल्क पर कर सकेगी।

लेकिन इस छूट के लिये जरूरी है कि उन उपकरणों और उत्पादों का उपयोग अनुसंधान कार्यों के लिये हो। टाटा पावर-डीडीएल की स्मार्ट ग्रिड लैब राजधानी के रोहिणी इलाके में स्थित है। इसे 2021 में ‘इन-हाउस’ अनुसंधान एवं विकास इकाई के तौर पर पहली बार मान्यता प्रदान की गई थी।

इस ‘लैब’ को यह दर्जा भागीदारी, विकसित उत्पादों, अनुसंधान एवं विकास को लेकर ढांचागत सुविधाएं, उपकरणों की लागत समेत कई अन्य मानकों की कड़ी मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर दिया गया था।

इस बारे में टाटा पावर-डीडीएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गणेश श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘’हमारी लैब को ‘इन-हाउस’ अनुसंधान एवं विकास इकाई के तौर पर मान्यता को आगे बढ़ाना अनुसंधान, परस्पर भागीदारी तथा नई प्रक्रियाओं एवं उत्पादों के विकास को लेकर हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है…।’’ टाटा पावर डीडीएल दिल्ली के उत्तरी भाग में करीब 70 लाख आबादी को बिजली वितरित करती है।

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