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नावाडीह : प्रखंड सह अंचल कार्यालय मे रिश्वत का बाजार गर्म
प्रखंड सह अंचल कार्यालय मे विगत कई माह से विकास योजनाओ व सरकारी कार्यालयों मे रिश्वत का बाजार गर्म है। जनता के कार्य मे रिश्वत की खुलेआम लेन देन का कारोबार चल रहा है जिसे लेकर कई राजनीतिक दल धरना-प्रदर्शन देकर आंदोलन की चेतवानी दी जा चुकी है वाबजूद रिश्वत के खेल मे अंकुश नही लग पा रही है।जिससे ग्रामीण परेशान है। सोमवार घनबाद के एसीबी की टीम एक लाभुक के शिकायत पर नावाडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचने की खबर से अधिकारियों कर्मचारियों मे हड़कंप मच गया , लोग विभिन्न बहाना बनाकर इधर उधर चले गये ।
दाखिल खारिज व लगाना वसुली चर्चे मे :
अंचल कार्यालय मे ग्रामीणो द्वारा जमीन के खरीद बिक्री करने के लिए अनुमंडल कार्यालय मे निबंधन होने के बाद अंचल कार्यालय मे दाखिल खारिज कर लगान देकर रसीद निर्गत किया जाता है। जिसमे लाभुक द्वारा आवेदन के आलोक मे राजस्व उपनिरीक्षक के स्थल जांच पड़ताल के रिपोर्ट के बाद अंचल निरीक्षक की जांच के बाद अंचल अधिकारी द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है चर्चा है कि ग्रामीण क्षेत्रो मे दाखिल खारिज के लिए दो हजार रूपया प्रति डीसमील व मुख्य सड़क किनारे आवासीय लायक जमीन पर यह राशि पांच हजार प्रति डीसमील बतौर चढ़वा के बाद होती है। इसके आलावे भुमि सत्यापन , जमीन विवाद पर रिपोर्ट , आवासीय जाति आय प्रमाण पत्र के लिए भी चढ़वा की रकम तय की गई है। इसी प्रकार प्रखंड कार्यालय मे विकास योजनाओ पर भी रिश्वत का खुला खेल हो रही है। मनरेगा योजना मे 30 से 35 प्रतिशत कमीशन वसुली जा रही है जिसमे अधिकारी ,कर्मचारी ,कनीय अभियंता ,मुखिया आदि का भी हिस्सा होती है। जबकि 15 वित्त आयोग की योजना मे संवेदक के जारिये पंचायत सचिवालय मे सीसीटीवी कैमरा , विधालयों मे ताडित चालक ,गांव मे पेपर्स ब्लोक, सोलर सिस्टम जलमिनार निर्माण कार्य मे कमीशन का दर फिक्स किया गया है। यही कारण है कि 10 -15 हजार लगत वाली ताड़ित चालक का भुगतान संवेदक को नारायणपुर ,चिरूडीह एवं कंजकिरो पंचायत मे लगभग डेढ़ लाख भुगतान कर राशि की बंदरबांट की गई। जिसकी चर्चा पुरे प्रखंड मे फैलने पर अनन फनन मे बीडीओ संजय सांडिल्य ने अन्य पंचायत के भुगतान पर रोक लगा दी।
हिस्सेदारी को लेकर सेविका सहायिका मे हो रही विवाद :
प्रखंड सह अंचल कार्यालय के आलावे बाल विकास परियोजना विभाग मे भी रिश्वत खोरी की खेल काफी पुरानी है। हाल मे रिश्वत राशि को लेकर सेविका एवं सहायिका की अलग अलग टीम का आंदोलन सड़क पर आ गई है। विभाग के अन्तर्गत प्रखंड मे 156 ऑगनबाडी केन्द्र स्थापित है जिसके सफल संचालन हेतू सभी केन्द्रो पर एक एक सेविका सहायिका पदस्थापित है। केन्द्र मे बालबाड़ी एवं किशोरियों एवं गर्भवती व धात्री महिलाओ के पोष्टिक आहार वितरण के लिए हर माह राशि दी जाती है। पुर्व मे उक्त राशि की निकासी सेविका एवं माता समिति की अध्यक्ष के संयुक्त खाते से निकासी होती थी परंतु अब माता समिति को हटाकर सेविका सहायिका के हस्ताक्षर से होती है सहायिकाओ का आरोप है कि उक्त राशि से सीडीपीओ ,महिला पर्यवेक्षिका, संवेदक दुकानदार एवं सेविका बंदरबांट करती है।वही सेविका का आरोप है कि सहायिका हर माह रिश्वत की मांग को लेकर राशि निकासी नही कर केन्द्र को बाधित कर रही है।
चार अधिकारी कर्मचारी चढ़े एसीबी के हत्थे :
भ्रष्टाचार को लेकर नावाडीह प्रखंड सह अंचल कार्यालय हमेशा सुर्खियों में रहा है यह रिश्वत का नंगा नाच कोई नया नहीं है प्रखंड के बीडीओ सह प्रभारी एमओ प्रभाष चंद दास 13 नवम्बर 2020 को जन वितरण प्रणाली के दुकानदार खेमिया देवी से दुकान चालू करवाने के लिए बीस हजार रूपया , 19 सितम्बर 2017 को एसीबी की टीम ने नावाडीह के तत्तकालीन बीडीओ अरूण उरांव को प्रखंड लिपिक सन्तोष कुमार से बेतन निकासी को लेकर 35 हजार रूपए रिश्वत लेते निजी चालक कलीम अंसारी के साथ इसी बीडीओ आवास से गिरफ्तार किया गया था। वहीं इसी वर्ष 13 जुलाई 2017 को आहारडीह पंचायत सचिव फिरोज अंसारी को 14 वीं वित्त आयोग से निर्मित नाली निर्माण के अंतिम भुगतान हेतु अभिकर्ता कमलचंद महतों से 2500 रूपया लेते प्रखंड मुख्यालय से गिरफ्तार किया गया था। थी। वहीं सुरही पीएनबी बैक के शाखा प्रबंधक भी शिक्षा लोन पास करने के नाम पर जुनोडीह के इस्लाम राय के शिकायत पर दस हजार रिश्वत लेते एसीबी के हत्थे चढ़ चुकें है।



